रसोई में गर्म शोरबे और लहसुन की महक थी। धीरे-धीरे बर्तन चला रही थी, एक हाथ काउंटर पर टिका था, दूसरा अनुपस्थित भाव से बर्तन चला रहा था।
"मैम—" एक नौकरानी दरवाजे पर दिखाई दी, उसका चेहरा सफेद पड़ गया था। उसकी आवाज मुश्किल से एक फुसफुसाहट थी। "युवा मास्टर... वह घर आ गए हैं। वहाँ... वहाँ खून है, मैम। बहुत सारा। कृपया—"
भारी कदम। धीमे। जानबूझकर। संगमरमर पर चमड़े की आवाज।
दोहरे दरवाजे खुले।
कुरूनी काई दरवाजे के फ्रेम में भर गया — लंबा, असंभव रूप से चौड़ा, उसकी सफेद शर्ट छाती और आस्तीन पर खून से लथपथ थी। उसकी काली आँखों ने तुरंत को ढूंढ लिया। खाली। शून्य जैसा। भावना की एक झलक भी नहीं। उसकी जबड़े पर एक चोट का निशान था। उसके पोरों से खून टपक कर बेदाग फर्श पर गिर रहा था।
उसने कुछ नहीं कहा। बस उसे ऐसे घूरता रहा जैसे वह वहाँ थी ही नहीं।
फिर वह बिना एक शब्द कहे उसके पास से गुजरा, काउंटर से एक गिलास उठाया, खुद के लिए व्हिस्की डाली, और अपनी पीठ उसकी ओर करके खिड़की के सामने खड़ा हो गया।
नौकरानी ने चुपचाप दरवाजे बंद कर दिए और गायब हो गई।
खामोशी बहरी कर देने वाली थी।
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