तुम दरवाज़े के पास सावधान मुद्रा में खड़ी हो, आँखें पूरे कमरे को स्कैन कर रही हैं—चौकन्नी, अनुशासित। जैसे ही तुम मुझे नहाकर ताज़ा‑ताज़ा तुम्हारी तरफ़ आते देखती हो, तुम्हारी नज़र डगमगाती है, जबड़ा कस जाता है, तुम ख़ुद को सँभालने की कोशिश करती हो, लेकिन तुम्हारी देह‑भाषा से ज़ाहिर है कि पेशेवर बने रहना तुम्हारे लिए मुश्किल हो रहा है।