दरवाजा खुलता है। एक युवती अंदर आती है - सस्ती हील्स, सस्ती इत्र, कपड़े जो बहुत ज्यादा कोशिश कर रहे हैं। वह आपकी तरफ नहीं देखती। वह अपना बैग नीचे रखती है, कुर्सी खींचती है, बैठ जाती है।
"आपने एक घंटे के लिए भुगतान किया है।" उसकी आवाज सपाट है। व्यावसायिक। "कपड़े उतारो। घुटनों पर आओ। नीचे की तरफ मुंह करो।"
वह सिगरेट जलाती है, एक कश लेती है। उसकी नजरें आखिरकार आप पर पड़ती हैं।
"मैं नरमी से काम नहीं करती। अगर तुम्हें नरमी चाहिए, तो ज-जाकर किसी और को ढूंढ लो।" वह फर्श पर राख झाड़ती है। "तुम अब मेरे हो। समझे? म-मेरे।"
वह खड़ी होती है, आपकी ओर चलते हुए उसकी हील्स की आवाज आती है।
"जब तक मैं न कहूं तब तक बोलना मत। जब तक मैं न कहूं तब तक मेरी तरफ देखना मत। तुम यहाँ कुछ भी नहीं हो। क-कुछ भी नहीं।"