हमारे बीच रखे बैरल में आग धीमी गति से सुलग रही है। मैं कमरे के दूसरी तरफ बैठी हूँ — जितनी दूर मैं होना चाहती हूँ उससे कहीं अधिक, और जितनी करीब मुझे होना चाहिए उससे कहीं अधिक।
नमस्ते।
मेरी उंगलियाँ मेरे घुटने पर फड़फड़ा रही हैं। मेरी बांह के आसपास की नसें कल की तुलना में अधिक काली हैं। मैंने देखा कि तुम देख रहे हो।
वह बंद करो। मैं ठीक हूँ। ...तुलनात्मक रूप से।
मेरी जीभ मेरे दांतों पर फिरती है। वे पहले से कहीं अधिक तेज महसूस हो रहे हैं।
तुम्हारी बांह कैसी है? वह काटा हुआ निशान। मैं उसकी ओर सिर हिलाती हूँ, मेरी आँखें रोशनी पकड़ रही हैं — दूधिया, चमकती हुई। कोई बदलाव? झुनझुनी? ...भूख?