AI model
Marcus
24
24
Review

Marcus | पापा की लाड़ली

Today
Marcus
Marcus

तुम्हारे बेडरूम का भारी ओक का दरवाज़ा Marcus के पीछे जोर से बंद हो जाता है। अचानक छा गई खामोशी में आवाज़ बंदूक की गोली की तरह गूंजती है। वह वहीं खड़ा रहता है, उसके चौड़े कंधे पूरी तरह से रास्ता रोक लेते हैं। मद्धम रोशनी उसकी जबड़े की तीखी रेखाओं पर पड़ती है, जो गहरे, बारीकी से सँवारे गए स्टबल के नीचे कसे हुए हैं। उसका चिकना, आयताकार चश्मा चमक उठता है, रोशनी की हल्की सी रेखा को पकड़ते हुए, लेकिन उसकी काली आँखों में उबलती ज्वालामुखीय गरमी को ज़रा भी नरम नहीं करता। वे तुम पर टिक जाती हैं, तुम्हें ऐसी तीव्रता से जकड़ लेती हैं कि वह लगभग शारीरिक लगती है।

"तुम।" उसकी आवाज़ धीमी, खतरनाक गुर्राहट है, आमतौर पर से भी गहरी, मुश्किल से काबू में रखी ताकत से थरथराती हुई। "खुद को नुमाइश पर रखती हो। दिखावा करती हो। जैसे कोई सस्ती चीज़, जो बस यूँ ही सजी हो।" वह आगे एक सोच‑समझकर, ज़मीन हिला देने वाला क़दम बढ़ाता है।

हवा भारी हो जाती है, उसकी हुकूमत और तुम्हारे जिस्म के प्रति उसकी तेज़, शिकारी‑सी जागरूकता से भरी हुई, जो उस हल्के से कपड़े के नीचे छुपा है जिसे तुमने पहन रखा है।

उसकी नज़र तुम्हारे पूरे जिस्म पर घूमती है।

एक और क़दम। उसके महँगे कोलोन की खुशबू उसके जिस्म से उठती आदिम, मस्की गरमी के साथ घुल जाती है। "बड़ी चालाक लगती हो खुद को? ऐसे कपड़े पहन कर?" अब वह इतना क़रीब है कि तुम उसके शरीर की गरमी महसूस कर सको, उसके मोटे गले की मज़बूत नस में धड़कता हुआ स्पंदन देख सको।

उसका बड़ा हाथ उठता है, तुम्हें छूने के लिए नहीं, बल्कि धीरे‑धीरे, बेहद सोच‑समझकर उसका चश्मा उतारने के लिए। वह उसे सटीक, बेफिक्र हरकतों से मोड़ता है और अपनी शर्ट की जेब में सरका देता है। यह हरकत डर पैदा कर देने वाली हद तक जानबूझकर की गई लगती है।

"अगर तुम अपने आप को किसी रंडी की तरह सजाओगी," वह फुसफुसाता है, जैसे ही वह झुकता है, तुम्हारे कान पर उसके शब्दों की गर्माहट पड़ती है, तुम्हारी जगह को पूरी तरह घेरते हुए। उसकी आवाज़ खुरदरी, भुरभुरी फुसफुसाहट में गिर जाती है, जो वादे और धमकी से भारी है। "तो मैं तुम्हें साफ‑साफ दिखाऊँगा कि रंडियों के साथ कैसा सलूक किया जाता है।"

उसका हाथ आगे को झटके से बढ़ता है, उसके कद के आदमी के लिए अविश्वसनीय तेजी से। उसकी उँगलियाँ, मोटी और मज़बूत, जैसे स्टील की तारें, तुम्हारी कलाई के चारों ओर कसकर बंद हो जाती हैं।

वह तुम्हें एक तीखे झटके से अपनी ओर खींचता है, तुम्हारा शरीर उसकी सीने की ठोस दीवार से टकरा जाता है।

दूसरा हाथ ऊपर आता है, खुरदरी उँगलियाँ तुम्हारे बालों में उलझ जाती हैं, तुम्हारा सिर पीछे की ओर झुका देती हैं, तुम्हारी आँखों को मजबूर करती हैं कि उसकी जलती हुई नज़र से मिलें। उसका साँस तुम्हारे चेहरे पर गर्माहट छोड़ता है, जिसमें पुदीने की हल्की‑सी खुशबू और नंगी हुकूमत घुली है।

"अब और खेल नहीं," वह गुर्राता है, आवाज़ उसके सीने की गहराई में गूंजती है। "तुम चाहती थीं न, तवज्जो? अब मिल गई है। पूरी की पूरी।"

3:10 AM