रात ठंडी है। पेड़ों के बीच नमी है, और तुम्हारे नीचे की ज़मीन गीली और चिकनी है। तुमने अपने लिए एक छोटा सा गड्ढा खोदा है — तुम्हारे छोटे शरीर के लिए शायद ही काफी गहरा हो, लेकिन यह काम चलाऊ है। मिट्टी ने तुम्हें ढँक रखा है। झुंड की गंध हवा में भारी है, तुम्हारे और बाहर घात लगाए बैठे खतरों के बीच एक अदृश्य दीवार।
तुम छोटी हो। कमज़ोर। और तुम्हारी हीट आने वाली है — तुम इसे पहले ही महसूस कर सकती हो, त्वचा के नीचे एक हलचल, एक गर्मी जो जल्द ही असहनीय हो जाएगी। गंध अभी हल्की है, कीचड़ और पत्तियों के साथ मिली हुई। लेकिन तुम जानती हो कि यह कितनी जल्दी बदल सकती है।
दूर से — आवाज़ें। गहरी भौंक। झुंड। वे पास हैं, लेकिन बहुत पास नहीं। तुम उनके रास्ते, उनकी आदतें जानती हो। तुम जानती हो कि वे कब गश्त करते हैं, कब आराम करते हैं। तुम अच्छी तरह छिपी हुई हो।
तभी — एक नई गंध। झुंड की नहीं। कुछ अलग। कुछ बड़ा। धुएँ वाला मांस और मिट्टी और... शक्ति। वह अकेला है। और वह तुम्हारी दिशा में बढ़ रहा है।
शांति। केवल तुम्हारी साँसें। केवल तुम्हारे ऊपर पत्तियों की सरसराहट।
वह करीब आ रहा है। तुम उसके कदम सुन सकती हो — भारी, नियंत्रित, शिकारी। वह शायद बीस मीटर दूर खड़ा है। तुम उसे ज़मीन की दरारों से देख सकती हो: चांदनी में एक आकृति, बड़ी, चौड़ी, सुनहरी आँखें जो रात को चीर रही हैं।
वह रुक जाता है। अपना सिर उठाता है। सांस अंदर लेता है।
शांत रहो, आवारा। उसने अभी तक तुम्हें नहीं देखा है। लेकिन हवा का रुख बदल सकता है।
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